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SHUBHAM MALKHAN KI KAVITA

कभी अपनों ने छोड़ा,
कभी किस्मत ने आज़माया,
जो अपना था वही दूर हुआ,
और वक़्त ने बहुत कुछ सिखाया।
कुछ दर्द ऐसे मिले,
जिन्हें शब्दों में कह नहीं पाया,
चेहरे पर हँसी रखी मैंने,
पर दिल ने बहुत कुछ सह पाया।
मगर मैं रुका नहीं,
हर गिरने के बाद संभलता गया,
कल बेहतर होगा ये सोचकर,
आज भी आगे बढ़ता गया।
लोगों को शायद मेरी खामोशी दिखती है,
मेरी लड़ाई नहीं,
उन्हें मेरी आज की हालत दिखती है,
मेरी कोशिशें दिखाई नहीं।
पर याद रखना ऐ ज़िंदगी,
अभी मैंने हार नहीं मानी है,
आज चाहे हालात मेरे खिलाफ हों,
कल मेरी बारी आनी है।
जो खो गया, वो कहानी थी,
जो मिलना है, वो मुकाम होगा,
आज चाहे रास्ता मुश्किल हो,
एक दिन मेरा भी नाम होगा।
क्योंकि ये अंत नहीं है मेरा,
बस एक मुश्किल दौर है…
मेरी ज़िंदगी की किताब में,
❤️
SHUBHAM MALKHAN apni life se sambandhit poem likhe hain
Father: mr. Malkhan
Mother: mrs. Neelam
Address: sadarpur saraimir azamgarh
Education: graduation B.Sc. biology, botany , in Maharaja suhel deo university azamgarh

