सतरङ्गी
By- VARUN SINGH GAUTAM सुबह – सुबह देखो सूरज आयाइसकी कितनी है सुन्दर लालिमा !नीलगगन सतरङ्गी स्वरूप – सीवसुन्धरा जीविका की परवरिश है खेत – खलियान भी है हरे – भरेसुन्दर – सुन्दर कितने मोहक !छोटे – छोटे कलित कलियाँ तरुवरकुसुम मीजान कितने मृदु धरा ! खेचर कलरव कितने अनमोल !कितने दिलकश पन्थ पङ्ख निराले …






