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BABITA SHARMA KI KAVITA

शीर्षक:- 26 जनवरी
26 जनवरी का ये दिन महान,
जब संविधान बना हमारी पहचान,
कलम की स्याही में बंधा आकाश,
हर नागरिक को मिला समान अधिकार का विश्वास…!
ना राजा, ना प्रजा, सब बराबर हैं, इंसान है
लोकतंत्र की यही तो सबसे बड़ी शान है,
कर्तव्य, अधिकार और न्याय का मोल,
भारत बना तब सच में अतुल्य और अनमोल…!
वीरों के बलिदानों की गूंज है इसमें,
संघर्षों की राख से उठी है ये रौशनी…
हर अनुच्छेद में छुपा है स्वप्न,
एक सशक्त, समरस, न्यायपूर्ण जीवन का प्रण…!
आज तिरंगा जब लहराता है आसमान में,
तो आत्मा गर्व से भर जाती है हर इंसान में,
आओ निभाएँ हम अपना धर्म,
देश को रखें सर्वोपरि, यही है सच्चा कर्म!
26 जनवरी हमें ये सिखलाए,
अधिकार से पहले कर्तव्य निभाए…
जै हिन्द!!
शीर्षक:- तुझे सोचते ही जाना है!
सोचती हूं तुझे तो मैं बस सोचती चली जाती हूं
अपने दिल दिमाग को काबू में ना रख पाती हूं
जिंदगी है चार दिन की तीन तो गुजर गई
बाकी की एक मैं तेरे साथ गुजारना चाहती हूं
ख्वाहिश नहीं है, ज़िद मेरी गर तू पूरी कर सके
तेरे कदमों से कदम मिलाकर मैं अब चलना चाहती हूँ
फरिश्ता नहीं हूं कोई, मैं बस अदना सी इंसान हूं
शरीफों की इस बस्ती में कुछ बगावत करना चाहती हूं
आसमान के तले बादलों पर मैं ख्वाब सजाना चाहती हूं
बन बारिश तुझ पर मैं बरस जाना चाहती हूं
सूरज की तेज़ रोशनी मुझको जला नहीं पाएगी
तू हाथ में हाथ थाम मेरा कोई शै मुझे झुका नहीं पाएगी
चल तू भी कुछ अब मन की गुजारिश पूरी कर ले
तपते हुए बदन पर बारिश की ठंडी बौछार कर ले
और देख, राहें कितनी भी मुश्किल हो हरपल मैं तेरे साथ हूं
रहेगा तेरा जो भी फैसला मैं तेरे हर फैसले के साथ हूँ….!
बबिता
रामनगर
वाराणसी
मेरा नाम बबीता है और मैं दिल्ली से हूं, फिलहाल मैं बनारस में रह रही हूं… मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और Bca किया है, बनारस से मैंने (M. A. hindi lit. gold medalist), B. Ed, M. Ed(education) से आगे की शिक्षा ग्रहण की है…अभी phd के लिए नेट दे रही हूँ…

