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NAMRATA PRAKASH KI KAVITA

शीर्षक:- रावण
चेहरे तो सबके पास है मगर,
मुझ-सा दिखा पाओगे क्या?
लिया प्रतिशोध बहन के अपमान का,
मुझ-सा भाई धर्म निभा पाओगे क्या?
था अहंकार मुझमे रख लो तुम भी,
मगर मुझ-सा ज्ञानी बन पाओगे क्या?
हरण कर लो नारी तुम भी
मगर, मेरी तरह पवित्रता का ख्याल रख पाओगे क्या?
हजारों रावण अपने भीतर लेकर आते हो मुझे जलाने….
चलो जल जाता हूं मैं इस बार भी मगर,
तुम मे से एक भी राम बन पाओगे क्या?
मुझे जलाकर तो चले जाओगे मगर,
अपने भीतर के रावण को जला पाओगे क्या?
शीर्षक:- सौ-सौ जनम प्रतीक्षा कर लूँ….
सौ-सौ जनम प्रतीक्षा कर लूँ
प्रिय मिलने का वचन भरो तो!
पलकों-पलकों शूल बुहारूँ
अँसुअन सींचू सौरभ गलियाँ
भँवरों पर पहरा बिठला दूँ
कहीं न जूठी कर दें कलियाँ
फूट पडे पतझर से लाली
तुम अरुणारे चरन धरो तो!
रात न मेरी दूध नहाई
प्रात न मेरा फूलों वाला
तार-तार हो गया निमोही
काया का रंगीन दुशाला
जीवन सिंदूरी हो जाए
तुम चितवन की किरन करो तो!
सूरज को अधरों पर धर लूँ
काजल कर आँजूँ अँधियारी
युग-युग के पल छिन गिन-गिनकर
बाट निहारूँ प्राण तुम्हारी
साँसों की ज़ंजीरें तोड़ूँ
तुम प्राणों की अगन हरो तो!
नम्रta..!!
शीर्षक:- डियर गर्ल्स
डियर गर्ल्स
बहुत कुछ बोलेगा तुमसे रात के आगोश मे,
पर तुम रहना अपने पूरे होश मे !
वो बात करेगा चांद-तारे तोड़ लाने की,
तुम जिद्द पर अड़ी रहना, सारी राहें तुम्हारी तरफ ही मोड़ लाने की !
वो तुम्हें कभी तारा तो कभी फलक का चांद बनाएगा,
अपनी बहकी-बहकी बातों मे उलझाएगा !
तुम मत आना उसकी बातों मे,
तुम मत सुनना उसे आगोश भरी रातों मे !
वो बहुत कुछ बोलेगा तुमसे रात के आगोश मे,
तुम सुनना वही जो बोलेगा वो पूरे होश मे..!!